Saturday, December 31, 2011

ज़िद है

ज़िद है खुश रहने की,
दर्द में मुस्कराने की,
खोए हुए को पाने की,
बंदिश से उसको छुड़ाने की|

ज़िद है स्नेह प्रकट करने की,
टूटे हुए दिल में प्यार भरने की,
खुद पे सितम सहने की,
और बदले में कुछ न कहने की|

ज़िद है भूख मिटाने की,
रोते हुए को हँसाने की,
बुराई को पराजित करने की,
शांति  का परचम लहराने की|

ज़िद है ऊंची छलांग लगाने की,
गिर के भी संभल जाने की,
चोट को भुलाने की,
मंज़िल को पा जाने की|

ज़िद है खुद की राह चुनने की,
और उन राहों पर निरंतर आगे बढ़ने की,
दिन में भी सपने देखने की,
और उन सपनो को पूरा करने की|

ज़िद है जीत जाने की,
और हार में जीतने वाले को सराहने की,
पर फिर से प्रयास करने की,
और कभी न हार मानने की|

ज़िद है खुद के फेसले लेने की,
और उन्हें अंत तक निभाने की,
उनके लिए कोई भी कीमत चुकाने की,
और कभी ना अफ़सोस जताने की|

ज़िद है तुम्हारी रक्षा करने की,
और इस प्रण के लिए प्राण गवाने की,
तुम्हे खुश रखने की,
और तुम्हारा साथ निभाने की|

ज़िद है सत्य मार्ग पर चलने की,
और मिथ्या को उजागर करने की,
सबका हित चाहने की,
सिद्धांततः जीवन बिताने की|

ज़िद, बस ज़िद ही तो है जीवन में,
कुछ कर गुजरने की,
ज़िद को ही हासिल कर जाने की,
असंभव को पा लेने की,
हार को मुह की खिलाने की|

~स्नेह, ज्ञान और सत्य;
हर्षद गुप्ता
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