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Monday, June 13, 2016

मैं लिखता हूँ

मैं ज़िंदा हूँ,
और ज़िन्दगी का क़र्ज़ चुकाने के लिए लिखता हूँ।
मैं लिखता हूँ,
हर लम्हे को यादगार बनाने के लिए लिखता हूँ।

मैं ज़िंदा हूँ,
और ज़िन्दगी की कश्मकश मिटाने के लिए लिखता हूँ।
मैं लिखता हूँ,
हर शब्द को अपना बनाने के लिए लिखता हूँ।

मैं ज़िंदा हूँ,
और ज़िंदा रहने के लिए लिखता हूँ।
मैं लिखता हूँ,
हर शब्द पर मर मिटने के लिए लिखता हूँ।

~स्नेह, प्रकाश, और सत्य;
हसरत बनारसी

[Translation: 
I am alive, and in order to pay off the debts of life, I write.
I write, to make every moment memorable, I write.

I am alive, and in order to reduce the dilemma of life, I write.
I write, to make every word my own, I write. 

I am alive, and in order to stay alive, I write. 
I write, to get annihilated on words, I write.]

Monday, May 2, 2016

सोने की कीमत

वह कहते है की सोना महंगा हो गया है ,
सोना क्या, यहाँ जीना महंगा हो गया है,
चार का चावल आज चालीस में बिक रहा है,
दो वक़्त की रोटी  के लिए, आज पूरा इंसान बिक है।

पर क्या जीना और सोना,
सच में महंगा हो गया है?

पाँच रुपये में,
रस्सी का फन्दा बांध,
ज़िन्दगी का कर अंत,
हम अंतकाल तक सो सकते है।

जीने का तोह पता नहीं,
पर बरसो बाद आज, ज़िन्दगी और सोना सस्ता हुआ है।

~स्नेह, प्रकाश, और सत्य;
हसरत बनारसी

Wednesday, December 23, 2015

Bachpan

बच्पन की दोस्ती कितनी हसींन होती है,
इसमें लेन-देन का नहीं होता हिसाब,
दोस्तों की ख़ुशी से खुश होते,
और उनके गम से उदास।
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चाहे ले लो हमसे हमारा धन सारा,
पर लौटा दो हमे बच्पन हमारा,
बहुत जी लिए हमने यह मनहूस जवानी के दिन,
थोड़ी मासूमियत और थोड़ी नादानी के बिन।

बहुत याद आते हैं हमे वह दिन पुराने,
दोस्तों के साथ बीतें वह पल सुहाने,
वह ख़्वाबों को पा लेने की उमीद,
वह रातों की चैन की नींद।

ले लो हमसे यह झूठी शान-ओ-शौखत,
और बदले में दे दो हमे भोले से चेहरे पे वह प्यारी सी मुस्कुहराहट,
वह शाम-सवेरे मीलों घूमना,
वह गिरना और फिर शंभालना।

जब हमे न था किसी से बैर,
और हम मांगते तेह सब की खैर,
क्या लौटा सकते हो हमे वह दिन,
हमे बताओ, ऐ अल्लाद्दीन के जीन।

~स्नेह, ज्ञान और सत्य;
एक अज्ञात कवि।